उन्नाव: मोहान विधानसभा में एक अदद जीत तलाश रही सपा

(फोटो व खबर- नमन मिश्रा)

उन्नाव: प्रदेश में कई बार हुकूमत कर चुकी समाजवादी पार्टी को मशहूर शायर और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना हसरत मोहानी की धरती पर कभी सफलता नहीं मिली जबकि यह क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य है। अब तक हुए 17 विधानसभा चुनावों में सपा का खाता नहीं खुल पाया है। सपा के लिए यह सीट जीतना आसान नहीं है। मोहान विधानसभा के वोटरों ने कम्युनिस्ट पार्टी पर भरोसा जताते हुए पांच बार पार्टी के विधायकों को जिताकर विधानसभा पहुँचाया।

मोहान भाजपा प्रत्याशी ब्रजेश कुमार रावत
मोहान सपा प्रत्याशी डॉ आँचल वर्मा

मोहान विधानसभा क्षेत्र में पुरुष मतदाता 1 लाख 85 हज़ार 358,महिला मतदाता 1 लाख 57 हज़ार 316 व मंगलामुखी  मतदाताओं की संख्या 28 है। इस प्रकार मोहान विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 3 लाख 42 हज़ार 702 है। जो विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी का चयन करेंगे। अगर बात पिछले विधानसभा चुनाव की करें तो वर्ष 2017 में हुए चुनाव में भाजपा के ब्रजेश रावत को 1 लाख 4 हज़ार 884 मत मिले थे। जबकि उनके निकटतम प्रत्याशी बसपा से राधे लाल रावत को 50 हज़ार 789 मत मिले थे। वही सपा व कांग्रेस गठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी भगवान दास कठेरिया को मात्र 34 हज़ार 465 मत मिले थे।

बताते चले कि वर्ष 1951 में हुए विधानसभा के पहले चुनाव में कांग्रेस से जटाशंकर ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1957 में सजीवन लाल व 1962 में भिक्खालाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीते। 1967 में जनता ने एक बार फिर कांग्रेस पर भरोसा जताकर एस राम को विधायक बनाया और 1969 में सजीवन लाल व 1974 में भिक्खालाल को फिर से कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीत मिली। 1977 में जनता ने जनता पार्टी के चंद्रपाल को मौका दिया। फिर 1980 में कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी भिक्खालाल को जिताया। वर्ष 1985 में कांग्रेस प्रत्याशी बद्री प्रसाद ने सीट पर अपना परचम लहराया। इसके बाद इन पार्टियों का रुतबा कम हुआ और भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दो बार 1989 और 1991 में बाबू मस्तराम को जिताकर भेजा। 1993 में जनता ने पहली बार बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी रामखेलावन को जीत दिलाई। 1996 के चुनाव में भाजपा ने फिर से पलटी मारी और लगातार दो बार 1996 और 2002 में बाबू मस्तराम को विधायक बनाया। 2007 में जनता का रुख एक बार फिर से बदला और बसपा का यहां पर खाता खुला। यहाँ से बसपा के प्रत्याशी के तौर पर राधेलाल ने जीत दर्ज की। यही नहीं दूसरी बार 2012 में भी बसपा के राधेलाल विधायक निर्वाचित हुए। अब तक हो चुके चुनावों में यहां पर सपा को एक बार भी सफलता नहीं मिली। 2012 में सपा लहर (पांच सीटों पर साइकिल दौड़ी थी) में भी यहां से बसपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। समाजवादी पार्टी ने यहाँ पर एक नया चेहरा उतारा है जो सपा के कार्यकर्ताओं के गले ही नहीं उतर पा रहा है। वही भाजपा प्रत्याशी को अपने रूठे हुए कार्यकर्ताओं को मनाने में लम्बा समय बीत गया। फिलहाल कोई क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है। बसपा से सेवक लाल रावत सपा और भाजपा प्रत्याशी के लिए गले की हड्डी बने हुए है। वही कांग्रेस से मधु रावत अपनी जमीन तलाश रही है।

मोहान बसपा प्रत्याशी सेवक लाल रावत
मोहान कांग्रेस प्रत्याशी मधु रावत

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